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रज़िया सुल्तान की रोचक कहानी

 रज़िया सुल्तान के बारे में आप सभी ने कहीं ना कहीं जरूर सुना या पढ़ा होगा और आपको यह जानने में भी उत्सुकता हुई होगी कि आखिर एक मुस्लिम महिला ने मात्र 4 साल के शासनकाल में ऐसे  क्या काम किए कि वह इतिहास में अमर हो गई , 
 इस लेख में रजिया सुल्तान के विभिन्न कार्यों तथा रजिया सुल्तान के बारे में रोचक जानकारी प्रस्तुत की गई है इस लेख के माध्यम से आपको निम्नलिखित सवालों को जानने का मौका मिलेगा जैसे

➤रज़िया  सुल्तान कौन थी ?

➤रज़िया  सुल्तान कब शासिका बनी ?

➤रज़िया  सुल्तान के पिता कौन थे ?

➤रज़िया  सुल्तान का मकबरा कहां है ?

➤रज़िया  सुल्तान ने किस से विवाह किया ?

➤रज़िया  सुल्तान किससे  प्रेम करती थी  ?

➤रज़िया  सुल्तान की मृत्यु कब हुई  ?

➤रज़िया  सुल्तान के  प्रमुख  कार्य आदि।

रजिया सुल्तान की रोचक कहानी
रजिया सुल्तान का जन्म 1205 में हुआ था उसके पिता का नाम इल्तुतमिश था , रजिया सुल्तान  ने 1236 से 1240 तक  दिल्ली सल्तनत पर शासन किया था, वह पहली महिला शासिका थी। उसने दिल्ली का शासन अपने पिता से उत्तराधिकार में प्राप्त किया था, और 1236 में दिल्ली की  सल्तनत  पर यह भारत की पहली मुस्लिम शासिका थी।
 रजिया सुल्तान बहुत ही बुद्धिमान एक श्रेष्ठ प्रशासक और अपने पिता की तरह ही  एक बहादुर योद्धा थी ,इस तथ्य के बावजूद कि उसका प्रशासन मात्र 4 वर्षों के लिए था इतिहास के पन्नों में उसके कार्य सुरक्षित हो चुके थे


रजिया सुल्तान का मकबरा

रजिया सुल्तान की रोचक कहानी
 दिल्ली में रजिया सुल्तान का मकबरा उन सभी स्थलों में से एक है । जो इस बहादुर महिला की स्मृतियों का स्मरण कराते हैं। वह पुरुषों की तरह सुसज्जित होकर खुले दरबार में बैठती थी,एक प्रभावशाली  शासिका थी। और उसमें एक शासक के सभी गुण बचपन से ही मौजूद थे ,और किशोरावस्था में ग्रहणी समूह की महिलाओं का संपर्क बहुत कम था। इसलिए वह मुस्लिम समुदाय की स्त्रियों के मूल व्यवहार को नहीं सीख पाई ,
वास्तव में सुल्तान बनने से पूर्व अपने पिता के प्रशासन के नियमों की तरह आकर्षित थी। एक सुल्तान की भांति राजा और राजमुकुट पहना और जब वह हाथी पर सवार होकर युद्ध में भाग लेती थी तो रीति-रिवाजों के विपरीत वह अपने चेहरे को खुला रहती थी , जिसका विरोध मुस्लिम समुदाय ने किया था। और यही कारण था उसके कम समय के शासन का ,
 इल्तुतमिश के बच्चों में से रुकनुद्दीन फिरोज राजकाज में सम्मिलित था। वह लगभग 7 महीनों से दिल्ली की देखभाल कर रहा था। 1236 में रजिया सुल्तान ने दिल्ली के निवासियों की मदद से अपने भाई को पूर्णतया पराजित कर दिया और वह शासिका बन गई।
उस समय जब रजिया सुल्तान ने शासन संभाला ,  राज्य को वजीर निजाम अल मुलक जुनेदी ने वफादारी करने से इंकार कर दिया और उसने कई अन्य लोगों के साथ मिलकर सुल्तान रजिया के खिलाफ कुछ समय के लिए युद्ध की घोषणा कर दी थी।
 इसके बावजूद भी रजिया सुल्तान ने वहां की प्रजा के लिए अनेक कार्य किए जो इस प्रकार है ----

रजिया सुल्तान के कार्य 


एक  समझदार   शासिका होते हुए अपने अधिकार क्षेत्र में और शांति स्थापित की, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति उसके द्वारा स्थापित किए गए नियमों का पालन करते थे। उसने अपने राष्ट्र के आधार पर विस्तार करने का  प्रयास किया, जिसके लिए उसने लेनदेन को बढ़ावा दिया,
 गलियों का निर्माण एवं कुओ की खुदाई इत्यादि कार्य करवाएं इसके अतिरिक्त उसने खोज कार्य के लिए विद्यालय संस्थाओं व स्थलों का निर्माण कराया और पुस्तकालय खुलवाएं जिससे शोधकर्ताओं को कुरान और मोहम्मद की नीतियों पर कार्य को बढ़ावा दिया।
 हिंदुओं ने विज्ञान विचार अंतरिक्ष विज्ञान और रचना में वांछित योगदान दिया जिससे विद्यालय और कॉलेजों में ध्यान  केंद्रित किया गया था।
 शिल्पकारिता  और संस्कृति के क्षेत्र में भी योगदान दिया और विद्वानों चित्रकारों और शिल्प कारों का समर्थन किया।
 इन सभी कार्यों के बावजूद भी रजिया सुल्तान का पतन उसी के कारण हुआ,
 रजिया को जमाल उद्दीन याकूत के प्रति एकतरफा प्यार ने बहुत नुकसान पहुंचाया। उसके अंत का कारण संतोषजनक प्रेम था।
 अल्तूनिया और रजिया युवा थे ,वे जैसे-जैसे साथ बड़े हुए वह रजिया से प्रेम करने लग गया था। उसकी बगावत का कारण मुल रूप से रजिया को वापस पाने की एक तकनीकी थी। इसलिए उसने याकूत  का कत्ल कर दिया, और रजिया से विवाह कर लिया। और बठिंडा से दिल्ली की ओर दोनों चल दिए।

रजिया सुल्तान  की मृत्यु 

13 अक्टूबर  1240 बहराम से पराजित हुई। और अगले ही दिन दोनों की हत्या कर दी गई।

मुझे उम्मीद है कि आप को रजिया सुल्तान  के बारे में यह जानकारी जरूर पसंद आयी  होगी , अगर आप भी कुछ सुझाव देना चाहते हैं या कुछ प्रश्न पूछना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में अपने सुझाव जरूर भेजें।



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