राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 महत्वपूर्ण तथ्य -आसान भाषा में


भारत में अभी तक कुल 3 शिक्षा नीतियों का क्रियान्वयन किया जा चुका है ,भारत की या यूं कहे कि स्वतंत्र भारत की पहली शिक्षा नीति वर्ष 1968 में बनी थी, इसके पश्चात दूसरी शिक्षा नीति 1986 में बनी थी दूसरी शिक्षा नीति जो वर्ष 1986 में बनी थी उसमें 1992 में कुछ संशोधन किए गए थे ,और उसके पश्चात वर्ष 2020 में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनी जिसे ई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020  या  new education policy 2020 के नाम से भी जानते 
हैं



राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 महत्वपूर्ण तथ्य


आज हम इस लेख के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्वपूर्ण तथ्यों ,एवं परीक्षा में पूछे जाने वाले राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से संबंधित प्रश्न  ,साथ ही साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्वपूर्ण प्रावधानों को आसान भाषा में समझेंगे, इस लेख को अच्छी तरीके से पढ़ने के उपरांत राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से संबंधित प्रश्न  एवं पूरी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आसान भाषा में समझने में काफी मदद मिलेगी New education policy 2020 in Hindi ,new national education policy 2020 in Hindi important fact



 नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 ,के तहत स्कूली शिक्षा में किए गए प्रमुख बदलाव


नई शिक्षा नीति 2020 एवं स्कूली शिक्षा 


School education in new national education policy 2020 in Hindi.


New national education policy 2020 and school education

नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूली शिक्षा में कई बदलाव किए गए इनमें से महत्वपूर्ण बदलाव इस प्रकार है।

➥अभी तक की स्कूली शिक्षा 10+2 प्रणाली पर आधारित है,अर्थात कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों को एक समान ही विषय पढ़ने होते थे और +2 अर्थात सेकेंडरी एजुकेशन में  कक्षा 11 से विषयों का चुनाव करना पड़ता है ,और यहां से वे तीन अलग-अलग विधाओं (स्ट्रीम्स )जिसे विज्ञान, वाणिज्य एवं कला (साइंस कॉमर्स एंड आर्ट) में विभाजित होते है,

स्कूली शिक्षा के इस 10+2 प्रणाली को नई प्रणाली जिसे 5+3+3+4  सिस्टम से प्रतिस्थापित किया जाएगा।

चलिए अब बात करते हैं कि आखिर नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 का 5+3+3+ 4 फॉर्मेट  या प्रणाली क्या है।


What is 5 + 3 + 3 + 4 format in new national education policy 2020 in Hindi



राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 महत्वपूर्ण तथ्य


नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 के तहत 5 + 3 + 3 + 4  फॉर्मेट  को इस प्रकार से समझते हैं।

इसमें पहले 5 का मतलब बच्चे की प्रारंभिक 5 वर्ष की शिक्षा से है ,जिसमें कक्षा दो तक की शिक्षा सम्मिलित की गई है, इसमें प्रारंभिक 3 वर्ष की शिक्षा ठीक उसी प्रकार से देने का प्रावधान किया गया है जिस प्रकार से अभी प्राइवेट स्कूल अपनी कक्षाओं का संचालन करते हैं ,जैसे किंडर गार्डन KG-1,KG-2 
। परंतु इस प्रकार की शिक्षा का प्रावधान अभी शासकीय या सरकारी स्कूलों में नहीं है ,वहां पर सीधे कक्षा -1 से प्रवेश दिया जाता है ,
नई शिक्षा नीति में निजी स्कूलों के द्वारा अपनाए जाने वाली इस प्रक्रिया को भी सम्मिलित किया गया है। 

चलिए अब बात करते हैं 5 +3+3+4 FORMAT  पहले 3 की

इस इनका मतलब कक्षा 2 से कक्षा 5 तक की 3 वर्षों की अवधी से है। जिसे प्राथमिक कक्षाएं कहा जाएगा।
अब इस फार्मूले के दूसरे 3 का मतलब है माध्यमिक स्कूली शिक्षा जिसे मिडिल स्कूल एजुकेशन भी कहते हैं यह  पहले की तरह ही कक्षा 5 से कक्षा 8 तक कुल 3 वर्षों की रहेगी।


अब बात करते हैं इस फार्मूले में आए आखरी 4 की ,इस 4 का मतलब सेकेंडरी एजुकेशन से है जिसमें प्रमुखता के साथ बदलाव किया गया है।

नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 में सेकेंडरी एजुकेशन में महत्वपूर्ण रूप से बदलाव किया गया है, चलिए उन बदलावों को एक-एक करके समझते हैं।

अभी तक की 10+2 शिक्षा प्रणाली में कक्षा 11 के बाद विषयों का चुनाव करना होता था, जिसमें मुख्य रुप से विज्ञान वाणिज्य एवं कला से संबंधित 3 विधाओं का चयन होता था ,तथा इन विधाओं में सम्मिलित विषय अनिवार्य रूप से विद्यार्थियों को पढ़ने होते थे ,परंतु वही ई शिक्षा नीति 2020 में इस बाध्यता को समाप्त किया गया है ,अब विद्यार्थी विषयो का चुनाव कक्षा 9 से ही कर सकेंगे तथा विज्ञान संकाय के विद्यार्थी अगर चाहे तो कला एवं वाणिज्य से संबंधित विषयों को भी चुन सकेंगे ,अर्थात अब इस extreme separation  की बाध्यता को समाप्त किया गया है, इसी प्रकार कला संकाय का विद्यार्थी अगर विज्ञान पढ़ने का इच्छुक है तो वह भी विज्ञान के किसी विषय को चुन सकता है ,


Board exam in new National Educational policy 2020 in Hindi

नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 में बोर्ड परीक्षाओं से संबंधित क्या बदलाव हुए हैं

बोर्ड परीक्षाओं के संचालन में नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 में कोई बदलाव नहीं किया गया है ,अर्थात बोर्ड परीक्षाएं पहले की ही भांति संचालित होगी, परंतु यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन का तरीका काफी बदला जाएगा ,अब विद्यार्थियों के द्वारा परीक्षा में लिखे गए उत्तर का मूल्यांकन शिक्षक के साथ-साथ उसके सहपाठी भी करेंगे।जिसे इस शिक्षा नीति में पीयर्स एंड टीचर्स एसेसमेंट peers and teachers assessment कहा गया है 

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि अब नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 10 एवं कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएं वर्ष में दो बार आयोजित की जाएगी ,तथा जिस में भी विद्यार्थी के अधिक अंक होंगे उसे फाइनल माना जाएगा ,अर्थात अब बोर्ड परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थियों को ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है ,
निसंदेह यह बदलाव बोर्ड परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव को हल्का करने में काफी मददगार होगा।


नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 कब तक लागू होगी 


नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020, को वर्ष 2022- 23 तक लागू करने कि शासन की योजना है ,हालांकि शिक्षकों के प्रशिक्षण एवं इससे संबंधित अन्य क्रियाकलाप साथ ही एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में भी बदलाव से संबंधित कार्य इसी वर्ष से प्रारंभ कर दिए जाएंगे,
 परंतु बोर्ड परीक्षाओं के संचालन की नई पद्धति वर्ष 2022-23 से लागू होने की संभावना है।


 नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख लक्ष्य एवं उद्देश्य


Objective and target of national education policy 2020 in Hindi


नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति में प्रमुख लक्ष्य ,ग्रॉस इनरोलमेंट रेशों (जिसे सामान्य रूप से विद्यार्थियों का स्कूलों में प्रवेश लेने  के रूप में समझा जा सकता है।)
इस gross enrollment ratio को सेकेंडरी कक्षाओं में वर्ष 2035 तक 100% करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है 
अभी यह अनुपात करीब 56% के आसपास है , वहीं higher education अर्थात कॉलेज एजुकेशन में इस ग्रॉस इनरोलमेंट रेशों को वर्ष 2035 तक 50% करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है 
अभी कॉलेज एजुकेशन में ग्रॉस इनरोलमेंट रेशों करीब 26% के आसपास हैं।


नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 में भाषा संबंधी प्रावधान

Three language formula in new education policy 2020.

Medium of education in new education policy 2020

नई शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों को प्राथमिक शालाओं में दी जाने वाली शिक्षा के माध्यम को लेकर कुछ विशेष प्रावधान किए गए हैं ,यह प्रावधान कुछ इस प्रकार है।

➥नई शिक्षा नीति के तहत अब कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों को शिक्षा उनकी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में देने का प्रावधान किया गया है।
साथ ही साथ थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला के तहत भी कुछ बदलाव किए गए हैं ,हालांकि यह थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला वर्ष 1986 की शिक्षा नीति के तहत लाया गया था ,जिसे कुछ बदलावों के साथ शिक्षा नीति 2020 में भी जारी रखा गया है।

नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति के तहत थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला या थ्री लैंग्वेज सिस्टम के तहत 3 भाषाओं में से 2 भाषाएं अनिवार्य रूप से भारतीय भाषाएं होंगी ,यह भारतीय भाषाएं संविधान की आठवीं अनुसूची में दी गई भाषाओं में से कोई भी हो सकती है, अर्थात नई शिक्षा नीति के तहत अब कोई भी शिक्षण संस्थान एक से अधिक विदेशी भाषाओं को शिक्षा का माध्यम नहीं बना सकेंगे।


नई शिक्षा नीति 2020 के तहत कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया 


नई शिक्षा नीति के कुछ महत्वपूर्ण बदलाव में यह प्रमुख है। इसको आसान भाषा में समझते हैं 
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 महत्वपूर्ण तथ्य


अभी तक कक्षा 12 के बाद कॉलेज में एडमिशन के लिए अलग-अलग प्रकार की प्रक्रिया अपना,ई जाती थी,कहीं पर CLASS-12  के परसेंटेज के आधार पर एडमिशन मिलता था तो कहीं पर एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर प्रवेश की प्रक्रिया अपनाई जाती थी ,
तथा अलग-अलग यूनिवर्सिटी एवं कॉलेजेस के लिए एंट्रेंस एग्जाम भी अलग-अलग आयोजित की जाती थी ,परंतु नई शिक्षा नीति में कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया के लिए NTA- जिसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के रूप में जाना जाएगा ,की स्थापना के प्रावधान किए गए हैं,
 अर्थात अब देश की सभी विश्वविद्यालयों में एवं सभी महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पूरे देश में CEE कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन के माध्यम से प्रवेश प्रक्रिया संचालित करेगी यह कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन वर्ष में दो बार आयोजित करवाई जाएगी.

(यह कुछ इसी प्रकार की प्रक्रिया होगी जो कुछ वर्षों पहले बैंकों में भर्ती के लिए आईबीपीएस के माध्यम से अपनाई गई थी, उस समय वर्ष में दो बार आई बी पी एस की परीक्षा आयोजित होती थी तथा वे स्कोर कार्ड विद्यार्थियों को देते थे ,और विद्यार्थी इन स्कोर कार्ड के आधार पर अलग-अलग बैंकों में जॉब के लिए आवेदन करते थे ,हालांकि आईबीपीएस की यह प्रक्रिया अब पूरी तरह से बदल गई है)


HECI- HIGER EDUCATION COMMISSION OF INDIA -NEW EDUCATION POLICY 2020


नई शिक्षा नीति 2020 के तहत उच्च शिक्षा में एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह किया गया है कि ,अब यूजीसी जिसे यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन अर्थात विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के रूप में जाना जाता है उसको समाप्त करके एक नया आयोग जिसका नाम हायर एजुकेशन कमिशन आफ इंडिया (HECI) होगा 
इसकी स्थापना के प्रावधान भी नई शिक्षा नीति में किए गए हैं साथ ही साथ कॉलेजों के किसी विश्वविद्यालय से संबद्धता की अनिवार्यता को भी समाप्त किया जाएगा।

चलिए अब बात करते हैं नई शिक्षा नीति 2020 के तहत कॉलेज डिग्री पर क्या असर होगा।


Higher education in new new Educational policy 2020

 college education in new education policy 2020 in hindi

नई शिक्षा नीति 2020 ,के तहत higher education  मैं बहुत महत्वपूर्ण एवं रोचक बदलाव किए गए हैं ,

चलिए उन बदलावों को एक-एक करके आसान भाषा में समझते हैं 
➥नई शिक्षा नीति 2020 के तहत अब सभी प्रकार की स्नातक उपाधियां अर्थात डिग्री कोर्सेज 4 वर्ष के होंगे ,अभी तक यह 3 वर्ष के भी होते थे, जिसे B.A. बीकॉम बीएससी आदि।
तथा इन 4 वर्षीय डिग्री कोर्सेज में विद्यार्थियों को अनेक विकल्प उपलब्ध होंगे ,
जैसे अगर कोई विद्यार्थी डिग्री कोर्स की 4 वर्ष की अवधि को पूरा ना करना चाहता हो ,और वह बीच में ही 1 वर्ष के उपरांत ही डिग्री कोर्स को छोड़ना चाहे ,तो उसे 1 वर्षीय सर्टिफिकेट दिया जाएगा 

अगर वह 2 वर्ष के उपरांत कॉलेज छोड़ता है तो उसे एडवांस डिप्लोमा दिया जाएगा 
और अगर वह 3 वर्ष के उपरांत कॉलेज छोड़ता है तो उसे स्नातक की उपाधि अर्थात डिग्री प्रदान की जाएगी 
और वह अगर 4 वर्ष की डिग्री पूरी करता है तो उसे एडवांस डिग्री प्रदान की जाएगी 
साथ ही साथ अब डिग्री कोर्स ,क्रेडिट स्कोर के आधार पर  संचालित होगा ,(हालांकि व्यवस्था अभी भी कई कॉलेज विशेष तौर से एग्रीकल्चर कॉलेज इंजीनियरिंग कॉलेज मेडिकल कॉलेज अपनाते आ रहे हैं।)

हायर एजुकेशन में किए गए बदलाव में एक और बदलाव बहुत महत्वपूर्ण है ,और वह बदलाव यह है कि अब पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को एम.फील करने की आवश्यकता नहीं होगी ,
अर्थात अब विद्यार्थी मास्टर डिग्री से सीधे पीएचडी में एडमिशन ले पाएंगे ,पहले मास्टर डिग्री के बाद एम.फिल करना अनिवार्य था ,उसके बाद ही पीएचडी के लिए आवेदन के पात्र माने जाते थे।


 नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति में वित्तीय प्रावधान 

नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 के वित्तीय प्रावधानों में शिक्षा पर जीडीपी का 6% हिस्सा खर्च करने के प्रावधान किए गए है ,,अभी तक जीडीपी का 4.40% खर्च शिक्षा के ऊपर किया जा रहा है,
 हालांकि जीडीपी का 6% शिक्षा के ऊपर खर्च करने के लक्ष्य इससे पूर्व की शिक्षा नीतियों में भी रखे गए थे  इससे पूर्व की दोनों शिक्षा नीतियों में वित्तीय प्रावधानों को पूर्ण रूप से नहीं पाया जा सका, इस बार की शिक्षा नीति में उम्मीद की जाना चाहिए कि यह वित्तीय प्रावधानों को भी पूरा करें।



नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति की प्रमुख आलोचनाएं /नई शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख कमियां


Drawback of new Educational policy 2020 /criticism of new Educational policy 2020.


नई राष्ट्रिय  शिक्षा नीति 2020 ,कि कुछ विद्वान निम्न कमियां बताकर आलोचना कर रहे हैं ,


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 महत्वपूर्ण तथ्य


नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 की  आलोचना के  प्रमुख बिंदु निम्न है 

➥नई शिक्षा नीति में प्रमुख रूप से आलोचना का बिंदु भाषा संबंधी प्रावधानों को लेकर  है ,
नई शिक्षा नीति में यह कहा गया है कि प्राथमिक शिक्षा क्षेत्रीय भाषा एवं मातृभाषा में प्रदान की जाएगी ,परंतु वही कुछ राज्य से आंध्र प्रदेश एवं अन्य राज्य तथा कुछ निजी विद्यालय इस पक्ष में नहीं है।।

➥नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा क्षेत्रीय या मातृभाषा में दिए जाने के प्रावधानों को लेकर उन लोगों में भी चिंता है जो अपने व्यापार व्यवसाय या नौकरी के कारण देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में स्थानांतरित होते हैं ,इसके चलते उनके बच्चे जो किसी क्षेत्र की मातृभाषा में अध्ययन कर रहे थे स्थानांतरण के उपरांत क्षेत्र बदलने से वहां की क्षेत्रीय भाषा भी बदल जाएगी ,और उन बच्चों को अध्ययन करने में काफी मुश्किल होगी।

नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति -२०२० की आलोचना में दूसरा बिंदु यह है कि इसमें जो प्रावधान किए गए हैं उनमें से अधिकांश प्रावधान निर्देशात्मक है, जिनको मानना या जिनका पालन करना बाध्यकारी नहीं है, ऐसी स्थिति में निजी विद्यालयों एवं निजी शिक्षण संस्थाओं को नई शिक्षा नीति में भाषाई प्रावधानों के अनुरूप संचालित करना बहुत कठिन होगा।

नई शिक्षा नीति 2020 की कमियों में एक कमी यह भी है कि इसमें फाउंडेशन एजुकेशन जो स्कूल में कक्षा -१ में एडमिशन से पूर्व ,3 वर्षों के लिए दी जाएगी ,उनके लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति के प्रावधान किए गए हैं ,
जैसा कि हम सभी जानते हैं आंगनवाड़ी में कार्य करने वाली महिलाओं एवं कर्मचारियों की शैक्षणिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं होती है कि वह बच्चों को पूर्णता सही रूप से शिक्षित कर पाए ,इसके लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की बहुत आवश्यकता है।

नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 की आलोचना का एक और बिंदु यह भी है कि इसमें विदेशी शिक्षण संस्थाओं को भी भारत में शिक्षण कार्य करने की अनुमति प्रदान की गई है, इसको लेकर के कुछ विद्वान यह आलोचना कर रहे हैं कि भारतीय बच्चों को शिक्षा अनिवार्य रूप से भारतीय शिक्षण संस्थाओं के द्वारा ही प्रदान की जाना चाहिए 

विदेशी शिक्षण संस्थाओं को भारतीय शिक्षा संचालित करने की अनुमति प्रदान करना एक उचित कदम नहीं है।



 शिक्षा से संबंधित संवैधानिक प्रावधान / शिक्षा नीति से संबंधित संवैधानिक प्रावधान 


संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार शिक्षा समवर्ती सूची का भाग है ,और जैसा कि आप सभी जानते हैं ,कि  समवर्ती सूची के विषय पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र एवं राज्य दोनों को होता है।

भारतीय संविधान में शिक्षा संबंधी प्रावधान मूल अधिकार, राज्य के नीति निर्देशक तत्व ,एवं मूल कर्तव्य तीनों में सम्मिलित किए गए हैं


 नई शिक्षा नीति के तहत  मानव संसाधन विकास मंत्रालय अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा

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