पुनर्जागरण क्या है ?संबंधित प्रश्न उत्तर PSC UPSC EXAM

पुनर्जागरण से संबंधित प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते ,हैं इस लेख में निम्नलिखित महत्वपूर्ण तथ्यों को सम्मिलित किया गया है जैसे-

पुनर्जागरण क्या है?

पुनर्जागरण के क्या कारण थे ?

पुनर्जागरण के क्या प्रभाव हुए

एवं पुनर्जागरण के महत्वपूर्ण घटनाक्रम तथा व्यक्ति से संबंधित परीक्षा उपयोगी जानकारी आसान भाषा में दी गई है।

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पुनर्जागरण से संबंधित प्रश्न



पुनर्जागरण क्या है? इसका क्या अर्थ है?  (
renaissance in hindi )

पुनर्जागरण का सामान्य अर्थ होता है फिर से जागना।

यह वह स्थिति थी जब यूरोपीय समाज मध्य काल के अंधकार में समय को पीछे छोड़कर नवीन मानवतावादी आधुनिक काल में प्रवेश कर रहा था।

पुनर्जागरण कोई धार्मिक या सामाजिक आंदोलन नहीं था बल्कि यह एक बौद्धिक एवं मानसिक क्रांति थी।

जिसका प्रारंभ सबसे पहले यूरोप के इटली में हुआ।

तथा सोलवीं सदी के आते आते यह क्रांति यूरोप के विभिन्न देशों में फैल गई।


यूरोप/इटली में पुनर्जागरण के क्या कारण थे ?

यूरोप में पुनर्जागरण के पीछे निम्नलिखित महत्वपूर्ण कारण जिम्मेदार थे।

1.धर्म युद्ध या कूसेड की भूमिका

यह धर्म युद्ध जिसे कूसेड भी कहा जाता है ,यरूशलम पर अधिकार को लेकर ईसाइयों एवं सेलजुक तुर्कों जिनका संबंध इस्लाम धर्म से था के मध्य लड़ा गया ,और इस युद्ध में ईसाइयों की पराजय हुई ,,

ईसाईयों की इस पराजय ने यूरोप के लोगों के मध्य चर्च की सर्वशक्तिमान होने की मान्यता एवं पादरियों का स्वयं को ईश्वर की प्रतिनिधि के रूप में व्यक्त करने वाले विचारों पर संशय पैदा हुआ तथा ,अब पादरियों की बातों का लोग अंधा अनुकरण करने से बचने लगे।

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वाणिज्य एवं व्यापार का विस्तार

वाणिज्य एवं व्यापार के विस्तार होने से इटली में बड़े शहरों जैसे वेनिस मिलान आदि का निर्माण हुआ ,यह बड़े शहर सामंतों के प्रभाव से लगभग मुक्त थे ,और यहां के व्यापारियों ने विद्वानों दार्शनिकों मूर्तिकार आदि को आश्रय प्रदान किया।


यूरोप/इटली में पुनर्जागरण के क्या कारण थे ?


कुस्तुनतुनिया का पतन

कुस्तुनतुनिया पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी थी, तथा यह बौद्धिक विचारों का एक प्रमुख केंद्र था ,

परंतु कुस्तुनतुनिया पर अरबों के आक्रमण होने से यहां के विभिन्न बौद्धिक वर्ग यूरोप के विभिन्न शहरों में और विशेषकर इटली के बड़े शहरों में स्थानांतरित हुआ ,

जिसके चलते उस बौद्धिक वर्ग की विचारधारा एवं नवीन विचारों का प्रचार-प्रसार कुस्तुनतुनिया से यूरोप के अनेक शहरों में संभव हुआ।

प्रेस या प्रकाशन तंत्र का विकास

प्रेस के विकास होने से विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद होने लगा, इसमें सबसे महत्वपूर्ण योगदान मार्टिन लूथर के द्वारा बाइबिल  का जर्मन  भाषा में अनुवाद करना था।

  अब सामान्य लोग भी बाइबिल  को पढ़कर उसकी सच्ची शिक्षा को ग्रहण कर सकते थे तथा पादरियों के द्वारा गुमराह होने से भी बचने लगे


पुनर्जागरण के प्रभाव

पुनर्जागरण की घटना ने संपूर्ण यूरोपीय समाज को निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित किया

पुनर्जागरण में मानवतावादी मूल्य एवं तार्किक विचारों को महत्व मिला।

सामंतवादी व्यवस्था कमजोर हुई जिससे कृषि को एवं छोटे व्यापारियों को सामंतों के शोषण से मुक्ति मिली।

निरंकुश राजतंत्र की अवधारणा को बल मिला क्योंकि लोग चर्च के अत्याचार से मुक्ति पाना चाहते थे।

साहित्यिक दार्शनिक स्थापत्य कला के क्षेत्रों में विद्वानों को प्रोत्साहन मिला।

हालांकि इस संपूर्ण बौद्धिक क्रांति में महिलाओं को कुछ विशेष लाभ नहीं मिला महिलाओं को अब भी व्यक्तिगत  मूल्यों एवं नागरिकता जैसे मूल्यों से वंचित रखा गया।


पुनर्जागरण से संबंधित महत्वपूर्ण व्यक्ति  घटनाएं  एवं तथ्य।


पुनर्जागरण की शुरुआत सबसे पहले इटली के फ्लोरेंस नगर में हुई थी।

पुनर्जागरण में तीन महत्वपूर्ण कलाकारों का विशेष महत्व रहा यह कलाकार 

  1. लियोनार्डो द विंची 
  2. माइकल एंजेलो और
  3.  राफेल थे।

लियोनार्डो द विंची एक चित्रकार मूर्तिकार इंजीनियर वैज्ञानिक दार्शनिक कवि गायक इतिहासकार आदि क्षेत्र में प्रसिद्धि प्राप्त प्रतिभा संपन्न व्यक्ति था।

 लियोनार्डो द विंची की प्रमुख रचनाएं (चित्र) द लास्ट सपर तथा  मोनालिसा है ,

माइकल एंजेलो की प्रमुख रचनाएं -द लास्ट जजमेंट ,द फॉल ऑफ मैन।

पुनर्जागरण का अग्रदूत दाँते  को कहा जाता था दाँते  का जन्म फ्लोरेंस नगर में हुआ था।

आधुनिक राजनीतिक दर्शन का जनक मेकियावेली को माना जाता है ,उस की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम प्रिंस है मेकियावेली फ्लोरेंसका रहने वाला था।

Divine Comedy एक प्रसिद्ध पुस्तक है, जिसे दाँते ने लिखा था ,इस पुस्तक में स्वर्ग से नरक की एक काल्पनिक यात्रा का रोचक वर्णन प्रस्तुत किया गया है जिसमें चर्च के पादरियों की निंदा की गई है।

 The praise of Folly एक प्रसिद्ध व्यंग्य किताब है, जिसके लेखक होलेंड के प्रसिद्ध विद्वान इरासमस थे ,

इस किताब में इरासमस ने तात्कालिक समय में चर्च में व्याप्त विभिन्न अनैतिक कार्यों ,ईसाई धर्म की विभिन्न कुरीतियों एवं पादरियों के विभिन्न अनैतिक क्रियाकलापों को खुलकर  वर्णित किया



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