उपभोक्ता न्यायालय [कंज्यूमर कोर्ट] अध्यक्ष , स्थापना ,कार्य

उपभोक्ता न्यायालय [कंज्यूमर कोर्ट] अध्यक्ष , स्थापना ,कार्य


उपभोक्ता न्यायालय अर्थात कंज्यूमर कोर्ट के अध्यक्ष , स्थापना ,उपभोक्ता न्यायालय के प्रमुख कार्य एवं उपभोक्ताओं के अधिकार( कंज्यूमर राइट) से संबंधित प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में (mppsc /upsc/ibps/ssc)अक्सर पूछे जाते हैं ,

यहां पर उपभोक्ता न्यायालय के कार्य ,अध्यक्ष, उपभोक्ता किसे कहते हैं ? उपभोक्ता के क्या क्या अधिकार है ?(कंज्यूमर राइट्स इन हिंदी) आदि के बारे में सरल भाषा में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई है


उपभोक्ता किसे कहते है ?

वह व्यक्ति जो किसी वस्तु या सेवा को स्वयं के उपभोग के लिए खरीदा है , उपभोक्ता कहलाता है,

उपभोक्ता के क्या क्या अधिकार है ?(कंज्यूमर राइट्स इन हिंदी) 

*उपभोक्ता अधिकार*:-भारत में 24 दिसंबर 1986 को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लागू किया गया, जिसके अंतर्गत उपभोक्ताओं को निम्न अधिकार प्रदान किए गए जो मौलिक अधिकारों की मूल धारणाओं से प्रेरित है-


a. उपभोक्ता शिक्षा अधिकार

b. विवाद सुलझाने का अधिकार

c. सुने जाने का अधिकार

d. चुनने का अधिकार

e. सूचना पाने का अधिकार

f. सुरक्षा का अधिकार


उपभोक्ता न्यायालय-consumer forum in hindi

यह उपभोक्ता विवादों के शीघ्र /संक्षिप्त निवारण प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है। 

यह भारत का एक अर्ध न्यायिक आयोग है जो 1988 में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत स्थापित किया गया। 

आयोग की अध्यक्षता भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आसींद या सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाती।


उपभोक्ता न्यायालय संरचना /प्रकार 

उपभोक्ता विवादों के त्वरित तथा सस्ते निपटान के लिए (राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला)  स्तरीय अर्ध न्यायिक मशीनरी स्थापित की है।

A. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग:- एक करोड़ से अधिक राशि के मामले

B. राज्य उपभोक्ता निवारण आयोग:-20 लाख से एक करोड़ की राशि के बीच के मामले

C. जिला मंच:-20 लाख की राशि से कम के मामले


*आयोग के समक्ष उठाए जाने वाले मुद्दे*

1. स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थ मिलाकर व्यापारियों द्वारा खाद्य पदार्थों का अपमिश्रण करना

2. भ्रामक विज्ञापनों द्वारा ग्राहकों की मांग प्रभावित करना

3. वस्तुओं के पैकेट  पर दी गई जानकारी से भिन्न  सामग्री अंदर रखना

4. भार और मापन में झूठे या निम्न स्तर के साधन उपयोग करना

5. एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचना

6. बिक्री तथा सेवाओं की शर्त और निबंधोंनो का पालन नहीं करना

7. उत्पादन के बारे में झूठी या अधूरी जानकारी देना इत्यादि।

इन्हे भी पढ़े ----

मध्य प्रदेश के प्रमुख खेल संस्थान अकादमी एवं स्टेडियम

Previous
Next Post »